बड़े काम के जुगाडु टिप्स जो आपकी रोजिंदा ज़िंदगी में बड़े काम आएंगे

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मेडिकल फैसिलिटी हर समय पहुंच में हो यह जरूरी नहीं। कई बार जरूरत के वक्त डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती और न ही छोटी-सी मेडिकल फैसिलिटी। ऐसे में कुछ जुगाड़ू मेडिकल टिप्स काफी काम आते हैं। डॉक्टर भी फौरी तौर पर इन टिप्स को आजमाने में कोई बुराई नहीं मानते।

 

अंदरूनी चोट :
सरसों के तेल में हल्दी गरम करके रुई से लगाएं। चाहें तो इसकी पट्टी भी बांध सकते हैं।

जख्म से खून बहना :
20 एमएल सरसों का तेल आधा चम्मद पिसी हल्दी और आधा चम्मच पिसी फिटकरी को मिलाकर गरम कर लें। इस मिक्सचर को गुनगुना होने पर हल्के हाथों से रुई के फाहे से घाव पर लगाएं। फिटकरी फौरन खून रोक देती है और हल्दी एक ऐंटी-बायॉटिक है। चाहें तो इसकी पट्टी भी बांध सकते हैं।

सिर दर्द:
अगर बीपी, टेंशन या गैस की वजह से सिरदर्द न होकर सामान्य सिरदर्द हो तो धनिया पाउडर का लेप माथे पर लगाएं। गैस की वजह से सिरदर्द हो तो एक चम्मच अजवायन, आधा चम्मच काला नमक और चुटकी भर हींग पानी में अच्छी तरह उबालकर गुनगुना होने पर पी लें।

कान में दर्द:
मुंह से सांस लेकर मुंह और नाक बंद कर लें और हवा का दबाव दर्द वाले कान की तरफ बनाएं।

पेट या शरीर के किसी अंग में सूजन या मोच आने पर अरंड (कैस्टर) के पत्ते को धोकर उस पर सरसों का तेल लगाकर हल्का गरम करके चोट, सूजन या मोच वाली जगह पर कपड़े से बांध दें। रोज अरंड का पत्ता बदलें।

अंग कट जाने पर:
अंग कटकर अलग हो जाएं तो कटे अंग पर लगी मिट्टी,गंदगी को साफ पानी से धोएं। इसे साफ कपड़े से पोंछ कर प्लास्टिक की साफ थैली में सील कर दें। अब दूसरी थैली में बर्फ डाल कर पहली थैली को इसमें रख दें। समय बर्बाद न कर तुरंत ऐसे अस्पताल पहुंचे जहां प्लास्टिक सर्जरी करने की सुविधा हो। दो घंटे के भीतर ऑपरेशन हो जाए तो अंग दोबारा जुड़ सकता है।

हर्निया का दर्द:
हर्निया का दर्द होने लगे तो लंगोट बांध लें। लंगोट न हो तो साफे या चुन्नी का इस्तेमाल भी लंगोट के रूप में किया जा सकता है।

दांतों में दर्द होने पर लौंग का तेल दांतों में लगा लें। तेल न हो तो 2 लौंग को आधा कप पानी में उबालकर उससे कुल्ले कर लें या 1 लौंग को भून कर दर्द वाली जगह पर दबा दें। हिचकियां आने पर देसी घी सुंघाएं और नाभि पर भी लगाएं। नीबू और काला नमक मिलाकर चाट लें। अगर हिचकियां रुक न रही हों तो एक सांस में थोड़ा-सा पानी पीकर डकार लेने की कोशिश करें।

सर्दियों में सांस की दिक्कत:
बादाम रोगन या बादाम तेल की 2-2 बूंदें रात को सोते वक्त नाक में डालें। भाप लेने के बाद भी ऐसा कर सकते हैं। छाती और पसलियों की सिकाई करें। 1 चम्मच बादाम का तेल पी लें। खांसी ना रुके तो काली मिर्च के 8-10 दाने पीसकर 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अदरक रस में मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटें। शुगर के रोगी या तो इसमें शहद की मात्रा कम कर लें या सिर्फ थोड़ा-सा काला नमक चाट लें। इससे भी खांसी में फर्क पड़ जाता है। सांस फूलने पर अलसी के बीजों (फ्लेक्स सीड) का चूर्ण आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम गुनगुने पानी से लें। इसे किसी भी मौसम में लिया जा सकता है। यह खांसी का भी अच्छा उपाय है। इसकी तासीर जरा गरम होती है इसलिए ज्यादा मात्रा न लें।

बार बार पेशाब आने पर
1. 5 पत्ते तुलसी, 2 दाने पिसी काली मिर्च, चुटकी भर मुलैठी पाउडर और चुटकी भर नमक मिलाकर एक कप पानी में उबालें। चाहें तो इसमें आधा चम्मच बनफ्शा भी डाल सकते हैं। जब आधा पानी रह जाए तो छानकर शहद मिलाकर पी लें।

2. तिल (काले और सफेद) और गुड़ बराबर मात्रा में खाएं। अगर किसी काले या सफेद में से कोई एक न मिले तो सिर्फ एक भी ले सकते हैं।

3. आधा चम्मच काले और उतने ही सफेद तिल मिलाकर सर्दियों में सुबह और शाम रोज खाएं, ऊपर से गरम पानी पी लें।

4. तिल, अजवायन और गुड़ बराबर मात्रा में आधा-आधा चम्मच मिला कर सुबह-शाम खाने से सर्दी के दिनों में राहत मिलती है।

5. रात में पानी और लिक्विड डाइट कम मात्रा में लें।

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