करियर और लाइफ में ग्रोथ के लिए हनुमानजी से सीखें ये सक्सेस मंत्र

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हनुमान चालीसा का पाठ करने से आपको आध्‍यात्मिक लाभ तो होता ही है, साथ ही इसकी चौपाइयों के अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्रों को अपनाने से आप नौकरी, करियर और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्‍त कर सकते हैं।

श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि।

अर्थ- अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूं।

गुरु का महत्व चालीसा के पहले दोहे की पहली पंक्ति में लिखा गया है। जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं। आज के दौर में गुरु हमारा मेंटर भी हो सकता है, बॉस भी। माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है। समझने वाली बात यह है कि गुरु यानी अपने से बड़ों का सम्मान करना जरूरी है। अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।

कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा।

अर्थ- आपके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।

आज के दौर में आपकी तरक्की इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप रहते और दिखते कैसे हैं। फर्स्ट इंप्रेशन अच्छा होना चाहिए। अगर आप बहुत गुणवान भी हैं लेकिन अच्छे से नहीं रहते हैं तो ये बात आपके करियर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रहन-सहन और ड्रेसिंग हमेशा अच्छा रखें।

बिद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर।

अर्थ- आप विद्यावान हैं, गुणों की खान हैं,चतुर भी हैं। भगवान राम के काम करने के लिए सदैव आतुर रहते हैं।

आज के दौर में एक अच्छी डिग्री होना बहुत जरूरी है। लेकिन चालीसा कहती है कि सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे। विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा, बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी। हनुमान में तीनों गुण हैं, वे सूर्य के शिष्य हैं, गुणी भी हैं और चतुर भी।

प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया।

अर्थ- आप राम चरित यानी राम की कथा सुनने में रसिक है, राम, लक्ष्मण और सीता तीनों ही आपके मन में वास करते हैं।

जो आपकी प्राथमिकता है, जो आपका काम है, उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं, सुनने में भी आपको रस आना चाहिए। अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे लीडर नहीं बन सकते।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा,
बिकट रूप धरि लंक जरावा

अर्थ- आपने अशोक वाटिका में सीता को अपने छोटे रूप में दर्शन दिए और लंका जलाते समय आपने बड़ा स्वरूप धारण किया।

कब, कहां, किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है, ये कला हनुमानजी से सीखी जा सकती है। सीता से जब अशोक वाटिका में मिले तो उनके सामने छोटे वानर के आकार में मिले। वहीं, जब लंका जलाई तो पर्वत के समान विशाल रूप धारण कर लिया। अक्सर लोग ये ही तय नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कब किसके सामने कैसा दिखना है या कैसा व्यवहार करना है।

तुम्हरो मंत्र बिभीसन माना,
लंकेस्वर भए सब जग जाना।

अर्थ- विभीषण ने आपकी सलाह मानी, वे लंका के राजा बने यह बात सारी दुनिया जानती है।

हनुमान, सीता की खोज में लंका गए तो वहां विभीषण से मिले। विभीषण को राम भक्त के रूप में देखकर उन्हें राम से मिलने की सलाह दे दी। विभीषण ने भी उस सलाह को माना और रावण के मरने के बाद वे राम द्वारा लंका के राजा बनाए गए। किसको, कहां, क्या सलाह देनी चाहिए, इसकी समझ बहुत आवश्यक है। सही समय पर सही इंसान को दी गई सलाह सिर्फ उसका ही फायदा नहीं करती, आपको भी कहीं ना कहीं फायदा पहुंचाती है।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही,
जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।

अर्थ- राम नाम की अंगूठी अपने मुख में रखकर आपने समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई अचरज नहीं है।

अगर आपको खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है तो आप कोई भी मुश्किल से मुश्किल टास्क को आसानी से पूरा कर सकते हैं। आज के युवाओं में एक कमी ये भी है कि उनका भरोसा बहुत जल्‍द टूट जाता है। आत्मविश्वास की कमी भी बहुत है। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है। अपने आप पर पूरा भरोसा रखें।

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